ज्ञान का ऐसा केंद्र बनना जो बेहतर समाज का निर्माण करे।
गुणवत्तापूर्ण सूचना संसाधनों और सेवाओं तक समय पर पहुँच उपलब्ध कराना।
संतुलित संग्रह बनाना, ई-संसाधनों को बढ़ावा देना और पढ़ने की आदत विकसित करना।
भारत में पुस्तकालय विज्ञान के जनक डॉ. एस. आर. रंगनाथन द्वारा प्रतिपादित।
पुस्तकें पढ़ने के लिए हैं, ताले में रखने के लिए नहीं।
हर व्यक्ति अपनी आवश्यकता की सही पुस्तक का अधिकारी है।
हमारे संग्रह की हर पुस्तक का कोई पाठक प्रतीक्षा में है।
व्यवस्थित अलमारियाँ और अच्छी सूची यानी तेज़ उत्तर।
पुस्तकालय पुस्तकों, सेवाओं और विचारों में निरंतर बढ़ता है।